विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर रेलवे बोर्ड की चुप्पी, जोन-मंडलों तक नहीं पहुंचा आदेश 14 अगस्त को देश याद कर रहा बंटवारे का दर्द, रेलवे में आयोजन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में की थी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने की घोषणा

रिपोर्ट: नवीन यादव VERDICT NEWS

झांसी। देशभर में आज 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन के दौरान विस्थापन, संघर्ष और बलिदान झेलने वाले लोगों की स्मृति में हर वर्ष 14 अगस्त को यह दिवस मनाए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद से देश में विभिन्न स्तरों पर विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।

लेकिन इस वर्ष रेलवे में इस दिवस को लेकर स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार रेलवे बोर्ड की ओर से 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के आयोजन को लेकर अब तक जोन और मंडल स्तर तक कोई स्पष्ट आदेश या विस्तृत दिशा-निर्देश नहीं पहुंचा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब देश इस ऐतिहासिक त्रासदी को याद कर रहा है, तो रेलवे जैसे देशव्यापी संगठन में इस अवसर पर कार्यक्रमों को लेकर स्पष्टता क्यों नहीं दिखाई दे रही।

रेलवे के जोन और मंडल स्तर पर स्वतंत्रता दिवस से जुड़े कार्यक्रमों की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। स्टेशन और रेलवे परिसरों में तिरंगा यात्रा, देशभक्ति कार्यक्रम तथा अन्य गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसके बावजूद विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को लेकर आधिकारिक स्तर पर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं देने की चर्चा रेल कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच बनी हुई है।

पूर्व वर्षों में रेलवे के मंडलों की ओर से प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर प्रदर्शनी लगाई जाती थी। इन प्रदर्शनी का उद्घाटन मंडल रेल प्रबंधक द्वारा किया जाता था और विभाजन की त्रासदी को झेल चुके बुजुर्गों को आमंत्रित कर सम्मानित भी किया जाता था। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को देश के विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, संघर्ष और पीड़ा से रूबरू कराया जाता था। इस बार इन परंपरागत आयोजनों को लेकर भी स्पष्टता नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।

विभाजन का दर्द रेलवे के इतिहास से भी गहराई से जुड़ा रहा है। वर्ष 1947 में देश के बंटवारे के दौरान लाखों लोगों ने रेलगाड़ियों के जरिए पलायन किया और अनेक यात्रियों ने हिंसा, विस्थापन और असहनीय पीड़ा का सामना किया। ऐसे में रेलवे के लिए यह दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय को याद करने का अवसर भी माना जा सकता है।

अब देखने वाली बात यह है कि रेलवे बोर्ड की ओर से इस संबंध में कोई आदेश या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं अथवा जोन और मंडल अपने स्तर पर ही इस दिवस को याद करते हैं।

 

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