पेट्रोल चोरों का पर्दाफाश: 11,000 लीटर पेट्रोल और 20 लाख का माल ज़ब्त!
इंद्र यादव/मुंबई/ठाणे,वाह भाई वाह! जब पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हों, तब भला चोर कैसे चुप बैठें? आम आदमी पम्प पर खड़े-खड़े जेब टटोलता रहे और ये महानुभाव बिना कागज़-पत्र के टैंकर भर-भरकर ‘होम डिलीवरी’ का धंधा चलाएँ। लेकिन इस बार मुंबई-ठाणे शिधावाटप विभाग के माननीय नियंत्रक चंद्रकांत डांगे साहेब के मार्गदर्शन और ठाणे प्रादेशिक कार्यालय के उपनियंत्रक भास्कर तायडे के तेज़-तर्रार पथ ने कळवा पुलिस के साथ मिलकर ऐसा भंडाफोड़ किया है कि चोरों के तो पसीने ही नहीं, बल्कि सपनों के महल भी ढह गए होंगे!
क्या है पूरा ‘रोमांचक’ किस्सा!
कळवा खाड़ी, मुंब्रा के पास एक संदिग्ध पेट्रोल टैंकर (नंबर MH 14 एम 8808) पर अचानक धावा बोल दिया गया। टीम ने जैसे ही गाड़ी रोकी, अंदर से लगभग 11,000 लीटर अवैध पेट्रोल निकल पड़ा। यानी इतना ‘काला सोना’ कि उससे कई महँगे कारों के टैंक कई बार भरे जा सकते थे। टैंकर समेत कुल ज़ब्त माल की कीमत करीब 20 लाख रुपये आँकी गई है। लगता है चोर साहब ने सोचा था कि पेट्रोल तो पानी की तरह सस्ता है, जितना चाहो उतना ढो लो!
चोर की ‘चतुराई’ और पुलिस की ‘मेहमाननवाज़ी’!
जब अधिकारियों ने चालक-सह-मालक (जो खुद ही गाड़ी का मालिक भी निकला और ड्राइवर भी) से कागजात मांगे, तो जनाब के पास दिखाने के लिए एक फटे हुए रसीद का टुकड़ा तक नहीं था! बिना दस्तावेज़ के इतनी बड़ी मात्रा में पेट्रोल का कारोबार चल रहा था मानो सड़क उनकी पैतृक जागीर हो और पुलिस सिर्फ सलामी देने के लिए खड़ी हो। शायद वे सोच रहे थे कि कागज़-पत्र तो सरकारी अफ़सरों के लिए होते हैं, असली कारोबारी तो ‘ट्रस्ट’ पर काम करते हैं!
फिलहाल कळवा पुलिस स्टेशन में इस शातिर ड्राइवर-सह-मालक के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी जोरों पर है। अब महाशय को हवालात की ‘वीआईपी’ सैर का सुनहरा मौका मिलने वाला है। उम्मीद है वहाँ पेट्रोल की जगह पानी और हवा मुफ़्त मिलेगी… कम से कम कागज़ तो माँगने वाले नहीं होंगे!
क्या सिर्फ एक टैंकर!
अब सवाल ये उठता है कि क्या ये अकेला ‘नायक’ था या इसके पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट बैठा है! जब पेट्रोल के दाम इतने ऊँचे हों तो छोटे-मोटे चोर तो बस झाँसी के रानी की तरह ‘मैं अकेली’ कहकर निकल भागते हैं, लेकिन असली बड़े खिलाड़ी पर्दे के पीछे से ही तार खींचते रहते हैं। क्या इस 11,000 लीटर वाले ‘कारनामे’ के पीछे और भी बड़े नाम छिपे हो सकते हैं? समय बताएगा… फिलहाल तो शिधावाटप विभाग और कळवा पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ़ संदेश दे दिया है – सड़क अब किसी की निजी जागीर नहीं है!
बस इतना कहना बाकी है – भाई साहब, अगली बार कम से कम एक फर्जी बिल तो बना लिया करो… नहीं तो ऐसे ही ‘मेहमाननवाज़ी’ मिलती रहेगी!










