Naveen yadav VERDICT NEWS
नई दिल्ली/सरगुजा। छत्तीसगढ़ कैडर के 2022 बैच के ट्रेनी आईपीएस अधिकारी राहुल बंसल पहली ही फील्ड पोस्टिंग के दौरान एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के आरोपों से घिर गए हैं। आरोप है कि सरगुजा में साइबर अपराध से जुड़े एक मामले को प्रभावित करने या निपटाने के लिए एक करोड़ रुपये की रकम मांगी गई और हवाला के माध्यम से दो किस्तों में 50-50 लाख रुपये पहुंचाए गए। मामले में राहुल बंसल के साथ दो अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आए हैं।
मामला दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत तक पहुंच चुका है। अदालत ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक और सीबीआई निदेशक से कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। शिकायतकर्ता की ओर से कथित तौर पर व्हाट्सऐप बातचीत और कॉल रिकॉर्डिंग को भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, अभी आरोपों की न्यायिक जांच चल रही है और राहुल बंसल ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
आईआईटी से पढ़ाई, यूपीएससी में सफलता और फिर विवाद
राहुल बंसल आईआईटी-बीएचयू से पढ़े हैं। उन्होंने 2021 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और 377वीं रैंक हासिल की। इससे पहले वे आयकर विभाग में अधिकारी के रूप में भी काम कर चुके थे। वर्ष 2022 में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुना गया और छत्तीसगढ़ कैडर मिला।
इस मामले को लेकर राहुल बंसल का एक पुराना साक्षात्कार भी चर्चा में है। उसमें उन्होंने बताया था कि अपने भाई का जन्म प्रमाणपत्र जल्दी बनवाने के लिए 500 रुपये की रिश्वत देने पर उन्हें बहुत बुरा लगा था। अब कुछ वर्षों बाद उन्हीं पर एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत से जुड़ा गंभीर आरोप लगा है।
पहली पोस्टिंग में ही एक करोड़ का आरोप
शिकायत के मुताबिक मई 2026 में कथित तौर पर 50-50 लाख रुपये की दो किस्तों में रकम हवाला के जरिए पहुंचाई गई। आरोप साइबर धोखाधड़ी की उस जांच से जुड़ा है, जिसमें बड़ी रकम और कथित संगठित साइबर गिरोह की जांच की जा रही थी। राहुल बंसल का कहना है कि जांच के दौरान एक बड़े साइबर गिरोह का पता चला और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
फिलहाल अदालत में मामला विचाराधीन है। ऐसे में एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने की बात को सिद्ध तथ्य नहीं बल्कि आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।










