ठाणे में मराठी पाठशाळा का कमाल! रिक्शा-टैक्सी ड्राइवर बने भाषा के विद्यार्थी,बांटे गए प्रमाण पत्र! इंद
इंद्र यादव/मुंबई/ठाणे शहर में एक ऐसी अनोखी और दिल छू लेने वाली पहल चल रही है, जिसने आम रिक्शा और टैक्सी चालकों को भी मराठी भाषा का विद्यार्थी बना दिया है। ‘आपली भाषा, आपली ओळख’ के नारे के साथ शुरू हुई ‘मराठी पाठशाळा’ अब पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गई है। इस पाठशाळा के सफल विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र बांटने का भव्य समारोह भी संपन्न हुआ।
यह पाठशाळा सिर्फ भाषा सिखाने के लिए नहीं, बल्कि चालकों और यात्रियों के बीच संवाद को और मीठा, आसान व सम्मानजनक बनाने के लिए शुरू की गई है। रिक्शा-टैक्सी चलाने वाले भाई जो रोज सैकड़ों यात्रियों से मिलते हैं, उन्हें सही मराठी बोलचाल, शुद्ध लेखन और रोज़मर्रा की बातचीत सिखाई जा रही है। मकसद साफ है—यात्री जब बोले “मला येथे जायचे आहे”, तो चालक सहजता से जवाब दे “या, बसा” या “नेतो”। मीटर चालू करने से लेकर धीरे चलाने, बाएं-दाएं मुड़ने और पैसे कैश या ऑनलाइन लेने तक की सारी बातें दोनों भाषाओं में आसान तरीके से समझाई जा रही हैं।
इस पूरे अभियान के मुख्य आयोजक हैं समाजसेवी राजकुमार रामनयन यादव और समाजसेवी महेंद्र सोडारी।
मार्गदर्शक शिक्षक हैं सिद्धार्थ कांबळे सर। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ संभाजी शिंदे और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मार्गदर्शन में यह काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। महाराष्ट्र शासन के परिवहन विभाग, राज्य मराठी विकास संस्था, कोकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ के संयुक्त तत्वावधान में ‘महाराष्ट्र माझा! मराठी संवाद भाषा!’ पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है।
पिछले दिनों चालकों की परीक्षा भी ली गई थी। 4 अगस्त 2026 को परीक्षा हुई थी और बड़ी संख्या में चालकों ने उत्साह से हिस्सा लिया। इंदिरा नगर (रोड नंबर 33, रूपादेवी पाडा नंबर 1, स्व. कर्मवीर रामनयन यादव मैदान, वागले एस्टेट, ठाणे) में प्रमाण पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। राजकुमार रामनयन यादव और महेंद्र सोडारी के हाथों सफल विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र दिए गए। मैदान में भारी भीड़ उमड़ी। चालक अपने परिवार के साथ पहुंचे थे। कई लोगों की आंखें भर आईं जब उन्हें पहली बार मराठी भाषा का प्रमाण पत्र मिला।
उपस्थित अतिथियों ने कहा कि यह सिर्फ परीक्षा पास करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मराठी भाषा, संस्कृति और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का आंदोलन है। स्थानीय नागरिकों और चालकों दोनों तरफ से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। कई यात्री भी खुश हैं कि अब ठाणे में सवारी के दौरान मराठी में बात करना आसान हो गया है।
यह पाठशाळा अब ठाणे की नई पहचान बनती जा रही है। जहां एक तरफ भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी को भी इसमें जोड़ने का सराहनीय काम हो रहा है। राजकुमार यादव और महेंद्र सोडारी की इस पहल को देखते हुए लगता है कि आने वाले दिनों में और ज्यादा चालक इस पाठशाळा से जुड़ेंगे और ठाणे सचमुच ‘मराठी संवाद’ का शहर बनेगा। सभी सफल विद्यार्थियों को ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं!










