दक्षिण रेलवे के तिरुच्ची मंडल के डीआरएम पर जनता से दूरी के आरोप, सोशल मीडिया पर मचा घमासान “जनता की आवाज कौन सुनेगा?” यात्री संघों से संवाद टूटने के दावे ने खड़े किए बड़े सवाल

तिरुच्ची। दक्षिण रेलवे के तिरुच्ची रेल मंडल के नए मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) के प्रशासनिक रवैये को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पोस्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि डीआरएम के पदभार संभालने के बाद से रेल यात्री संघों और आम लोगों से सीधे मुलाकात और संवाद का सिलसिला सीमित हो गया है।

वायरल पोस्ट में दावा किया गया है कि समस्याओं और मांगों को लेकर पहुंचने वाले लोगों को अपने सांसद से संपर्क करने की सलाह दी जाती है। लेखक ने सवाल उठाया है कि जब समस्या रेलवे से जुड़ी है तो उसकी सुनवाई के लिए जनता को रेलवे अधिकारियों तक पहुंचने में परेशानी क्यों हो?

सांसद अपनी जगह, रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी अपनी

पोस्ट में कहा गया है कि सांसद जनता के प्रतिनिधि हैं और अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन यात्री सुविधाओं, ट्रेनों, स्टेशनों और रेल सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को सुनना रेलवे अधिकारियों की प्रशासनिक जिम्मेदारी का भी हिस्सा है।

यात्री संघों को लेकर पोस्ट में कहा गया है कि उनके पदाधिकारी किसी निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि आम यात्रियों की समस्याओं को रेलवे के सामने रखने के लिए अपना समय और मेहनत लगाते हैं। ऐसे में उनके साथ संवाद का रास्ता खुला रहना जरूरी है।

कडलूर की कथित बहस ने बढ़ाई चिंता

वायरल पोस्ट में कडलूर में अधिकारियों और जनता के बीच हुई कथित बहस का भी उल्लेख किया गया है। लेखक ने ऐसी घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अधिकारियों को जनता की समस्याएं सुननी चाहिए और जनता को भी प्रशासनिक पक्ष समझने का प्रयास करना चाहिए।

पूर्व अधिकारियों की कार्यशैली बनी मिसाल

सोशल मीडिया पोस्ट में हरिकुमार आईआरटीएस के कार्यकाल की सराहना की गई है। दावा किया गया है कि वह यात्री संघों से नियमित संवाद रखते थे, संदेशों का जवाब देते थे और मिलने के लिए समय भी देते थे।

वहीं पूर्व डीआरएम अनबझगन की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि वह भी एक संदेश पर मिलने का समय देते और यात्री संगठनों की मांगों पर कार्रवाई करते थे।

निजी आलोचना नहीं, संवाद बहाल करने की मांग

पोस्ट के लेखक ने कहा है कि उसका उद्देश्य किसी अधिकारी की व्यक्तिगत आलोचना करना नहीं, बल्कि दक्षिण रेलवे प्रशासन और जनता के बीच संवाद का मजबूत पुल कायम रखना है। बेहतर संवाद और आपसी समझ से ही यात्री समस्याओं का समाधान और रेल सेवाओं में सुधार संभव है।

अब सवाल यह है कि क्या तिरुच्ची रेल मंडल प्रशासन सोशल मीडिया पर वायरल इन आरोपों पर अपना पक्ष रखेगा? क्या यात्री संघों और आम जनता के लिए डीआरएम स्तर पर सीधे संवाद की व्यवस्था पहले की तरह प्रभावी होगी?

नोट: खबर में उल्लिखित आरोप सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में किए गए दावों पर आधारित हैं। उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। तिरुच्ची रेल मंडल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

रिपोर्ट: नवीन यादव | VERDICT NEWS

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