आईजी आरपीएफ साहब! झांसी मंडल की आउट पोस्टों पर जरा गौर फरमाइए 12-12 घंटे की ड्यूटी से बेहाल जवान, लंबे रेल सेक्शन में स्टाफ का टोटा! केबल चोरी, चेन पुलिंग और अवैध गतिविधियों की जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर
रिपोर्ट नवीन यादव
झांसी। उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में रेलवे सुरक्षा बल की विभिन्न आउट पोस्टों पर तैनात जवानों को लेकर सूत्रों से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार कई आउट पोस्टों पर सीमित स्टाफ के चलते आरपीएफ कर्मियों से 12-12 घंटे तक ड्यूटी कराई जा रही है। लंबे रेल सेक्शन और लगातार बढ़ती सुरक्षा जिम्मेदारियों के बीच जवानों पर काम का दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक कई आउट पोस्टों का कार्यक्षेत्र काफी लंबा है। ऐसे में रेलवे लाइन और परिसर की निगरानी के साथ-साथ केबल चोरी, चेन पुलिंग, रेलवे क्षेत्र में अवैध तरीके से कार्य करने वालों तथा अन्य सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई की जिम्मेदारी भी इन्हीं जवानों के कंधों पर रहती है।
किसी घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचना, घटनास्थल की निगरानी करना, संदिग्धों की तलाश करना और रेलवे संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना आरपीएफ कर्मियों की जिम्मेदारी होती है। सूत्रों का कहना है कि सीमित संख्या में उपलब्ध स्टाफ के कारण कई जगह ड्यूटी का अतिरिक्त दबाव जवानों पर पड़ रहा है।
लगातार लंबी ड्यूटी से स्वास्थ्य पर भी असर की आशंका
सूत्रों के अनुसार लगातार 12-12 घंटे की ड्यूटी और लंबे रेल सेक्शन में सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों के कारण जवानों पर शारीरिक एवं मानसिक थकान का दबाव बढ़ सकता है। पर्याप्त विश्राम नहीं मिलने की स्थिति में उनके बीमार पड़ने या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां उत्पन्न होने की आशंका भी जताई जा रही है। ऐसे में जवानों के स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था, दोनों को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
लंबे सेक्शन के हिसाब से स्टाफ बढ़ाने की जरूरत
सूत्रों के अनुसार आउट पोस्टों के कार्यक्षेत्र और वहां की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को देखते हुए स्टाफ की संख्या की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। यदि लंबे सेक्शन के अनुपात में पर्याप्त जवान उपलब्ध हों तो सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सकता है तथा कर्मचारियों पर पड़ रहे अतिरिक्त ड्यूटी के दबाव को भी कम किया जा सकता है।
आईजी आरपीएफ के संज्ञान पर टिकी निगाहें
आरपीएफ कर्मियों की इस कथित परेशानी को लेकर अब आईजी आरपीएफ से मामले का संज्ञान लेकर आउट पोस्टों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करने की उम्मीद जताई जा रही है। सवाल यह भी है कि लंबे रेल सेक्शन की सुरक्षा, चोरी की घटनाओं पर निगरानी और चेन पुलिंग जैसी घटनाओं से निपटने के लिए क्या वर्तमान स्टाफ पर्याप्त है?
यदि किसी आउट पोस्ट पर स्टाफ कम है और कार्यक्षेत्र लंबा है तो वहां अतिरिक्त बल की आवश्यकता का आकलन किया जाना जरूरी है। इससे जवानों को पर्याप्त विश्राम मिल सकेगा और सुरक्षा ड्यूटी भी अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेगी।
हालांकि यह पूरी जानकारी सूत्रों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब देखना होगा कि आरपीएफ के उच्च अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और क्या आउट पोस्टों पर स्टाफ बढ़ाने अथवा ड्यूटी व्यवस्था की समीक्षा को लेकर कोई कदम उठाया जाता है।










