चलती ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसी 63 वर्षीय यात्री की जिंदगी, आरपीएफ सिपाही ने खींचकर बचाया एक पल की देरी पड़ सकती थी भारी—साहस और सूझबूझ दिखाने वाले आरपीएफ सिपाही बाबू प्रसाद प्रजापति बने ‘कर्मचारी ऑफ द मंथ

रिपोर्ट नवीन यादव

झाँसी। महोबा रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे 63 वर्षीय यात्री की जिंदगी उस वक्त सांसों के बीच अटक गई, जब वह ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच नीचे जाने लगा। हालात बेहद गंभीर थे और एक पल की चूक जानलेवा साबित हो सकती थी। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ सिपाही बाबू प्रसाद प्रजापति ने अदम्य साहस, सतर्कता और त्वरित निर्णय क्षमता का परिचय देते हुए यात्री को तत्काल खींचकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

घटना 12 अगस्त 2026 की है। महोबा स्टेशन पर आरपीएफ सिपाही बाबू प्रसाद प्रजापति एंटी क्राइम पेट्रोलिंग, यात्री सुरक्षा एवं ट्रेन पासिंग ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान ट्रेन संख्या 20975 प्लेटफॉर्म नंबर एक से रवाना हो रही थी। तभी करीब 63 वर्षीय यात्री ने चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास किया।

चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश में यात्री का संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच नीचे जाने लगा। खतरे को भांपते ही आरपीएफ सिपाही बाबू प्रसाद प्रजापति ने बिना एक क्षण गंवाए तत्काल यात्री को पकड़कर बाहर खींच लिया। उनकी फुर्ती और साहस से बड़ा हादसा टल गया और यात्री की जान बच गई।

साहस का सम्मान, बने ‘कर्मचारी ऑफ द मंथ’

आरपीएफ सिपाही बाबू प्रसाद प्रजापति की सजगता, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और त्वरित निर्णय क्षमता को देखते हुए मंडल स्तर पर उनके कार्य की सराहना की गई। उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें ‘कर्मचारी ऑफ द मंथ’ चुना गया।

मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार ने आरपीएफ सिपाही बाबू प्रसाद प्रजापति को ₹2,000 नकद पुरस्कार एवं प्रशस्ति प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर एडीआरएम इंफ्रा प्रेम प्रकाश शर्मा, एडीआरएम परिचालन नंदीश शुक्ला तथा वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त जितेन्द्र कुमार शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश बनी जान पर भारी

यह घटना रेलवे यात्रियों के लिए भी बड़ा सबक है। चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है। महोबा स्टेशन की इस घटना में आरपीएफ सिपाही बाबू प्रसाद प्रजापति की एक पल की सतर्कता ने 63 वर्षीय यात्री को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।

 

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