प्रशांत यादव की रणनीति से वेलंकन्नी में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ पर आरपीएफ का पहरा 498 ट्रेनों में 4.72 लाख यात्रियों की आवाजाही, न चोरों की चली न असामाजिक तत्वों की रस्सी से भीड़ नियंत्रण से लेकर ड्रोन और खोजी दस्ते तक—हर मोर्चे पर आरपीएफ की पैनी निगाह

 

नागपट्टिनम, 14 सितंबर। आस्था के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल वेलंकन्नी महोत्सव के दौरान जब तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा तो रेलवे सुरक्षा के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी थी। दक्षिणी रेलवे जोन के तिरुचिरापल्ली रेल मंडल में इस चुनौती का मोर्चा वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त प्रशांत यादव के नेतृत्व में आरपीएफ ने संभाला। 25 अगस्त से 13 सितंबर तक नागपट्टिनम और वेलंकन्नी स्टेशनों पर 498 ट्रेनों और करीब 4 लाख 72 हजार 500 यात्रियों की आवाजाही के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को पटरी से उतरने नहीं दिया गया।

भीड़ बेकाबू होने से पहले आरपीएफ ने कसी कमर

नागपट्टिनम स्टेशन पर 35 और वेलंकन्नी स्टेशन पर 25 आरपीएफ जवान लगातार मोर्चे पर रहे। भीड़ को एक साथ प्लेटफार्म पर टूटने से रोकने के लिए रस्सी आधारित व्यवस्था लागू की गई। ट्रेन के पूरी तरह रुकने के बाद ही यात्रियों को नियंत्रित तरीके से सवार कराया गया, जबकि पहले उतरने वाले यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस व्यवस्था ने भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई।

सीसीटीवी से आसमान तक निगरानी, संदिग्धों के लिए चौतरफा घेरा

सिर्फ प्लेटफार्म पर जवानों की तैनाती तक सुरक्षा सीमित नहीं रही। सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन से हवाई निगरानी, बम निरोधक एवं खोजी कुत्ता दस्ते की जांच तथा अपराध नियंत्रण और खुफिया शाखाओं की निगरानी से सुरक्षा का बहुस्तरीय घेरा तैयार किया गया। आरपीएफ ने राजकीय रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस के साथ लगातार तालमेल बनाकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी।

4.72 लाख यात्रियों की भीड़, फिर भी बड़ी घटना नहीं

महोत्सव के दौरान करीब 2 लाख 55 हजार यात्री ट्रेनों से उतरे, जबकि 2 लाख 17 हजार 500 यात्री ट्रेनों में सवार हुए। इतनी बड़ी यात्री आवाजाही के बीच कोई बड़ी चोरी की घटना, बड़ी असामाजिक गतिविधि या गंभीर सुरक्षा घटना सामने नहीं आई। यात्रियों की ओर से भी कोई बड़ी शिकायत दर्ज नहीं हुई।

रेलवे को महोत्सव अवधि में टिकटों से करीब 45 लाख रुपये की आय हुई। आंकड़े बताते हैं कि चुनौती सिर्फ भीड़ की नहीं थी, बल्कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाने की थी।

वेलंकन्नी में आस्था का सैलाब था, ट्रेनों में भीड़ थी और सुरक्षा की बड़ी परीक्षा थी—लेकिन आरपीएफ ने मोर्चा संभाले रखा। वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त प्रशांत यादव के नेतृत्व में आरपीएफ, राजकीय रेलवे पुलिस और स्थानीय पुलिस के समन्वित प्रयासों ने महोत्सव को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई।

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